उज्जैन
खुसूर-फुसूर
कंचन के लिए वीरता पुरस्कार की मांग
संभाग के नीमच जिला अंतर्गत पिछले सप्ताह अपना जीवन दान कर 20 से अधिक आंगनवाडी के बच्चों को जीवनदान देने वाली कंचन बाई के बलिदान को शासन प्रशासन ने सम्मान देते हुए उनके परिजनों को 4 लाख की सहायता राशि दी थी। इसके साथ ही उनके बच्चों के शिक्षा का दायित्व भी सरकार ने लिया है। उनके अदम्य साहस को देखते हुए समाज में उन्हें वीरता पुरस्कार की मांग उठने लगी है। जावद तहसील के ग्राम रानापुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और ‘जय माता दी स्व-सहायता समूह’ की अध्यक्ष कंचन मेघवाल ने अपने प्राणों की आहुति देकर मानवता की एक बेमिसाल इबारत लिखी है। आंगनवाड़ी के मासूम बच्चों को मधुमक्खियों के जानलेवा हमले से बचाने के लिए उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए खुद को न्योछावर कर दिया।
हजारों डंक सहे, पर बच्चों को आंच नहीं आने दी। सामाजिक रूप से उठ रही मांग में कहा जा रहा है कि यह कृत्य केवल कर्तव्य का पालन नहीं, बल्कि अदम्य साहस और शहादत है। उन्होंने अपनी जान देकर 20 घरों के चिरागों को बुझने से बचाया है। वे नन्हें बच्चों की जान बचाते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं। शासन –प्रशासन से कंचन बाई को मरणोपरांत ‘शहीद’ का दर्जा दिया जाने और वीरता के लिए अर्जुन पुरस्कार अथवा समकक्ष राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजे जाने की मांग बराबर सामने आ रही है। खुसूर-फुसूर है कि महिला के अदम्य साहस से ही 20 घरों के चिराग रौशन हैं ऐसे में शासन, प्रशासन को उनकी पारिवारिक स्थितियों का ध्यान रखते हुए और समाज में मानवीय संवेदनशीलता को बढावा देने के लिए उन्हें ‘शहीद’ के दर्जा के साथ वीरता पुरूस्कार दिया जाना समाजहित और भविष्य में बढावा देने वाला ही साबित होगा।